इंडस्ट्री में पिछले कुछ समय से चल रही चर्चाओं पर अब विराम लग गया है, क्योंकि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार कार्ड में पते के सुधार (Address Update) को लेकर एक बड़ा और राहत भरा अपडेट साझा किया है। अक्सर उन लोगों को आधार अपडेट कराने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था, जिनके पास अपने नाम पर कोई वैध दस्तावेज (Valid Documents) जैसे बिजली बिल, रेंट एग्रीमेंट या बैंक पासबुक नहीं होती थी। अब सरकार ने ‘Head of Family’ (HoF) आधारित ऑनलाइन एड्रेस अपडेट की सुविधा को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है।
यह नया बदलाव विशेष रूप से उन लोगों के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है जो अपने परिवार के साथ रहते हैं या हाल ही में शिफ्ट हुए हैं। अब आपको आधार सेंटर के चक्कर काटने या किसी राजपत्रित अधिकारी (Gazetted Officer) के दस्तखत के लिए भटकने की ज़रूरत नहीं है।
Quick Facts: आधार एड्रेस अपडेट (बिना व्यक्तिगत दस्तावेज)
| मुख्य विवरण | जानकारी |
| सुविधा का नाम | Head of Family (HoF) Based Address Update |
| जरूरी पात्रता | आधार में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर होना अनिवार्य |
| मुख्य दस्तावेज | परिवार के मुखिया का आधार और ‘Proof of Relationship’ (या सेल्फ डिक्लेरेशन) |
| सरकारी फीस | ₹50 (ऑनलाइन पेमेंट) |
| समय सीमा | आमतौर पर 15 से 30 कार्य दिवस |
| आधिकारिक पोर्टल | myaadhaar.uidai.gov.in |
बिना डॉक्यूमेंट्स एड्रेस कैसे बदलें: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
UIDAI ने इस प्रक्रिया को काफी सरल और सुरक्षित बनाया है। यहाँ पूरी प्रक्रिया का विवरण दिया गया है:
1. लॉगिन और विकल्प का चुनाव
सबसे पहले UIDAI के आधिकारिक ‘My Aadhaar’ पोर्टल पर जाएं। यहाँ अपने आधार नंबर और रजिस्टर्ड मोबाइल पर आए OTP के माध्यम से लॉगिन करें। डैशबोर्ड पर आपको ‘Update Aadhaar’ के सेक्शन में ‘Head of Family (HoF) based Address Update’ का विकल्प दिखाई देगा। इस पर क्लिक करें।
2. मुखिया (HoF) का विवरण दर्ज करना
इस स्टेप में आपको उस व्यक्ति का आधार नंबर डालना होगा जिसे आप ‘Head of Family’ के रूप में चुन रहे हैं (जैसे पिता, पति, माता या पत्नी)।
- सिस्टम सुरक्षा कारणों से केवल आधार नंबर के अंतिम कुछ अंक दिखाएगा ताकि गोपनीयता बनी रहे।
- आधार नंबर डालने के बाद आपको मुखिया के साथ अपना संबंध (Relationship) चुनना होगा (जैसे- Son, Daughter, Spouse आदि)।
3. संबंध का प्रमाण (Proof of Relationship)
यहाँ आपको एक दस्तावेज अपलोड करना होगा जो आपके और मुखिया के बीच संबंध को दर्शाता हो। इसके लिए राशन कार्ड, मैरिज सर्टिफिकेट, पासपोर्ट या जन्म प्रमाण पत्र का उपयोग किया जा सकता है।
विशेष नोट: यदि आपके पास इनमें से कोई भी दस्तावेज नहीं है, तो घबराएं नहीं। UIDAI के पोर्टल पर एक ‘Self-Declaration Form’ का फॉर्मेट उपलब्ध है। मुखिया द्वारा इस फॉर्म को भरकर और हस्ताक्षर करके अपलोड करने पर भी इसे वैध प्रमाण माना जाएगा।
4. फीस का भुगतान
डॉक्यूमेंट अपलोड करने के बाद आपको ₹50 की नॉन-रिफंडेबल फीस देनी होगी। यह भुगतान यूपीआई, नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड के माध्यम से ऑनलाइन किया जा सकता है। भुगतान सफल होते ही आपको एक ‘Service Request Number’ (SRN) प्राप्त होगा।
5. मुखिया की सहमति (The Critical Step)
यह प्रक्रिया तब तक अधूरी है जब तक परिवार का मुखिया इसे मंजूरी नहीं देता। मुखिया को अपने आधार पोर्टल पर लॉगिन करना होगा और ‘Pending Requests’ में जाकर आपके द्वारा भेजी गई रिक्वेस्ट को स्वीकार (Approve) करना होगा। यह प्रक्रिया 30 दिनों के भीतर पूरी होनी अनिवार्य है।
इस बदलाव की ज़रूरत क्यों पड़ी? विश्लेषण
आधार कार्ड आज केवल एक पहचान पत्र नहीं, बल्कि डिजिटल इंडिया की रीढ़ बन चुका है। बैंक खाता खोलने से लेकर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने तक, सही पते का होना अनिवार्य है।
- माइग्रेशन की समस्या: भारत में एक बड़ी आबादी काम के सिलसिले में शहरों में शिफ्ट होती है। किराए के घरों में रहने वाले छात्रों और गृहणियों के पास अक्सर अपने नाम पर पते का कोई प्रमाण नहीं होता।
- दलालों पर लगाम: पहले लोग बिना डॉक्यूमेंट के एड्रेस बदलवाने के लिए आधार सेंटर के बाहर सक्रिय दलालों को मोटी रकम देते थे। इस डिजिटल व्यवस्था ने बिचौलियों की भूमिका खत्म कर दी है।
- डेटा की शुद्धता: UIDAI का लक्ष्य है कि हर 10 साल में नागरिक अपना आधार डेटा अपडेट करें। पते की प्रक्रिया को आसान बनाकर सरकार नागरिकों को डेटा अपडेट करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
भविष्य में होने वाले संभावित बदलाव और प्रभाव
आने वाले समय में आधार एड्रेस अपडेट की प्रक्रिया और भी अधिक ‘ऑटोमेटेड’ हो सकती है। सरकार डिजिलॉकर (DigiLocker) के साथ इसके एकीकरण (Integration) को और मजबूत कर रही है। इससे भविष्य में शायद दस्तावेज अपलोड करने की भी ज़रूरत न पड़े और डेटा सीधे अन्य सरकारी विभागों से सिंक (Sync) हो जाए।
सुरक्षा के नज़रिए से, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और फेस ऑथेंटिकेशन (Face Authentication) को भी ऑनलाइन एड्रेस अपडेट का हिस्सा बनाया जा सकता है ताकि किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े को पूरी तरह रोका जा सके।
सुरेंद्र का नज़रिया (Analysis)
एक संपादक और विश्लेषक के रूप में मेरा मानना है कि UIDAI का यह कदम ‘Ease of Living’ की दिशा में एक बहुत बड़ा क्रांतिकारी कदम है। अक्सर सरकारी प्रक्रियाएं अपनी जटिलता के कारण आम आदमी के लिए बोझ बन जाती हैं, लेकिन HoF आधारित यह सिस्टम इस मिथक को तोड़ता है।
डेटा और ट्रेंड्स की बात करें तो:
- समावेशिता (Inclusivity): यह व्यवस्था उन करोड़ों महिलाओं और बच्चों को मुख्यधारा के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ती है जिनके पास स्वयं के नाम पर संपत्ति या बिल नहीं हैं।
- सुरक्षा बनाम सुविधा: हालाँकि यह सुविधा बहुत आसान है, लेकिन ‘सेल्फ-डिक्लेरेशन’ के दुरुपयोग की संभावना हमेशा बनी रहती है। यही कारण है कि UIDAI ने मुखिया की OTP आधारित सहमति को अनिवार्य रखा है, जो सुरक्षा का एक दोहरा कवच (Double Layer Security) प्रदान करता है।
- भविष्य की राह: मेरी राय में, यह केवल पते तक सीमित नहीं रहना चाहिए। भविष्य में अन्य डेमोग्राफिक बदलावों के लिए भी ‘पारिवारिक सत्यापन’ (Family Validation) को एक मानक प्रक्रिया बनाना चाहिए। इससे न केवल सिस्टम पारदर्शी होगा, बल्कि सरकारी डेटाबेस में परिवार का एक संगठित ढांचा (Family Tree) भी तैयार हो सकेगा।
नागरिकों को मेरी सलाह है कि वे अपने आधार में मोबाइल नंबर हमेशा अपडेट रखें, क्योंकि बिना रजिस्टर्ड नंबर के ये तमाम डिजिटल सुविधाएं निष्प्रभावी हैं।
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